लबों पे मुस्कान चाहता है
गिरती हूँ तो कैसे संभालना है
गिरती हूँ तो कैसे संभालना है
ये जानता है
ऐसा है मेरा हमसफ़र
ऐसा है मेरा हमसफ़र
खुद से भी ज्यादा
मेरी परवाह करता है
अपनी हर ख़ुशी से पहले
अपनी हर ख़ुशी से पहले
वो मेरी ख़ुशी चुनता है
अपने से पहले वो मुझे रखता है
मेरे लिए अपनी राहें और अपनी
अपने से पहले वो मुझे रखता है
मेरे लिए अपनी राहें और अपनी
खुद की मंजिल को भी बदलता है
मेरे लिये वो जीता है
मुझ पर ही मरता है
मेरे लिये वो जीता है
मुझ पर ही मरता है
लड़ता है झगड़ता है पर
प्यार भी मुझी से करता है
बदलता नहीं वो मुझे
वो मेरे लिए खुद को बदलता है
मेरे लिए हर सपनो को वो देखता है
और उन सपनो को पूरा करता है
प्यार ऐसा ही होता है
जो सच में वो मुझे करता है
वो आज भी दीवानों
बदलता नहीं वो मुझे
वो मेरे लिए खुद को बदलता है
मेरे लिए हर सपनो को वो देखता है
और उन सपनो को पूरा करता है
प्यार ऐसा ही होता है
जो सच में वो मुझे करता है
वो आज भी दीवानों
की तरह मुझे चाहता है
हाथ पकड़कर मेरा
हाथ पकड़कर मेरा
दुनिया के हर मोड़ पर
मुझे आगे बढ़ाना चाहता है
उसके होने से मेरे जीवन का
मुझे आगे बढ़ाना चाहता है
उसके होने से मेरे जीवन का
सूनापन मिट जाता है
उसके होने से मुझे
उसके होने से मुझे
होंसला और सुकून आता है
वो है तो हर हाल में
वो है तो हर हाल में
जीने को दिल चाहता है
जैसी हूँ मै
जैसी हूँ मै
उसने मुझे वैसा स्वीकार किया
मुझे नहीं बदला
मुझे नहीं बदला
खुद को ही मेरी हर खुशी के लिए तैयार किया
उदास होती हूँ
उदास होती हूँ
तो वो मुझे हंसाता है
हर पल मेरा साथ निभाता है
ऐसा है मेरा हमसफ़र
हर पल मेरा साथ निभाता है
ऐसा है मेरा हमसफ़र
जो बस मुझे चाहता है
और क्यां मांगू खुदा से
जब ऐसा हमसफ़र किसी को मिलता है
वो तो बस
जब ऐसा हमसफ़र किसी को मिलता है
वो तो बस
खुदा का शुक्रिया ही अदा करता है
शालिनी गुप्ता
No comments:
Post a Comment