घर की रौनक

किसी भी बंधन में बंधकर 
नहीं वो रहना चाहती 
पंछी की तरह आकाश में 
उड़ना है वो चाहती 

तितली की तरह उड़कर 
हर रंग को वो देखना है चाहती
खुशियों के लिए अपनी वो जीना है चाहती

गम से सामना गर हो भी जाये तो
नहीं वो घबराती
थक भी जायें गर कदम
पर मंजिल की और वो 
अपना हर कदम है बढाती

खामोश रहकर नहीं वो 
शोर मचाकर ज़िंदगी को जीना है चाहती

पीछे मुड़कर नहीं देखती वो
सिर्फ आगे बढ़ना है चाहती

ऐसी है वो मेरी नन्ही पारी
जो अपने पंखो को फैलाना है चाहती
सब के लिए खुशियाँ चुनती
अपनी हर जगह मुस्कुराहट ही उसने है बाँटी

उसका हर सपना पूरा हो
उसकी ख़ुशी से हमें ज़िंदगी और 
भी खूबसूरत नज़र है आती

उसे वो सब मिले जो वो है चाहती
यही दुआ यही आशीष सिर्फ
हमारे लबों पर है आती

शालिनी गुप्ता




 




इजहारे इश्क

तेरी हर बात मुझसे शुरू होकर
मुझ पर ही खत्म होती है
तेरी ज़िंदगी मुझसे शुरू होकर
मुझ पर ही खत्म होती है

तेरी हर धड़कन मुझसे शुरू होकर
मुझ पर ही खत्म होती है
तेरी हर राह मुझसे शुरू होकर
मुझ पर ही खत्म होती है

ये प्यार की हद है तेरी
जो मुझ से शुरू होकर
मुझ पर ही खत्म होती है

तेरे प्यार के नग्में
मुझ से शुरू होकर
मुझ पर ही खत्म होते हैं

और क्या कहूं ए मेरे हमसफ़र
तेरी हर तकरार
और उसके बाद
तेरी वो मान लेना
मेरी खातिर हार
मुझ से शुरू होकर
मुझ पर ही खत्म होती है

ज़िंदगी तेरे साथ शुरू की
और तेरे साथ ही खूबसूरत 
और हंसीं होती है

तेरे साथ ही शुरू होकर ज़िंदगी
तुझ पर ही ख़त्म होती है

शालिनी गुप्ता 


मेरा आशियां

छोटा सा आशियां है मेरा
जिसे मैने बनाया हैं
रंग भरे है सपनों के उसमें
उसे अपना ज़हाँ बनाया है

छोटी सी दुनिया है मेरी
जिसमे मेरे अपने रहते हैं
में चाहती हूँ उन्हें
वो भी जी जां से मुझे चाहते हैं

लबों पर मुस्कुराहट रहती है
दिल में सुकूं रहता है
अपने इस आशियां में
जिसे बनाने में अपना 
दिल और जान लगाया है
प्यार का रंग है
विश्वास की रोशनी उसमे
जिसे अपना जहाँ बनाया है

एक छोटा सा आशियां मेरा
जिसमें हर ख्वाब अपना सच पाया है
ज़िंदगी यहीं बीतादी अपनी
और ज़िंदगी को खूबसूरत बनाया है


छोटा सा आशियां है मेरा
जिसमें मैंने सब कुछ पाया है
एक छोटा सा जहाँ
जिसे अपना बनाया है

शालिनी गुप्ता








सिंदूर का शौर्य

तूफां का मंजर आया है
फिर इतिहास बनाने का समय आया है

फिर देश की मिट्टी पर 
लहू बहाने का समय आया है

हर सैनिक की कुर्बानी का अब समय आया है

देश की मिट्टी पर हर बेटों के साथ 
माँओं का भी बलिदान रंग लाया है

झंडे के रंग को 
बरक़रार रखने के लिए
कितने सैनिको ने खून बहाया है

देश की आन को बचाने के लिए बेटों के साथ 
माँओं का भी बलिदान काम आया है

खतरों के बादल मंडरा रहें है चारो तरफ 
उन बादलों को हटाने का समय आया है

हर तूफां से लड़ने और देश पर 
मर मिटने का समय आया है

सिन्दूर जो उजाड़े थे 
उन्हें अब बचाने का समय आया है

देश की संस्कृति पर 
मर मिटने का समय आया है

देश की मिटटी को बचाने का समय आया है 
फिर देश की मिट्टी पर 
लहू बहाने का समय आया है 

शालिनी गुप्ता 

दास्तान-ए-इश्क़

आँखों में खुशी 
लबों पे मुस्कान चाहता है

गिरती हूँ तो कैसे संभालना है 
ये जानता है

ऐसा है मेरा हमसफ़र 

खुद से भी ज्यादा 
मेरी परवाह करता है 
अपनी हर ख़ुशी से पहले 
वो मेरी ख़ुशी चुनता है 

अपने से पहले वो मुझे रखता है 
मेरे लिए अपनी राहें और अपनी 
खुद की मंजिल को भी बदलता है 

मेरे लिये वो जीता है 
मुझ पर ही मरता है 

लड़ता है झगड़ता है पर 
प्यार भी मुझी से करता है 

बदलता नहीं वो मुझे 
वो मेरे लिए खुद को बदलता है 

मेरे लिए हर सपनो को वो देखता है 
और उन सपनो को पूरा करता है 

प्यार ऐसा ही होता है 
जो सच में वो मुझे करता है 

वो आज भी दीवानों 
की तरह मुझे चाहता है

हाथ पकड़कर मेरा 
दुनिया के हर मोड़ पर 
मुझे आगे बढ़ाना चाहता है

उसके होने से मेरे जीवन का 
सूनापन मिट जाता है

उसके होने से मुझे 
होंसला और सुकून आता है

वो है तो हर हाल में 
जीने को दिल चाहता है

जैसी हूँ मै 
उसने मुझे वैसा स्वीकार किया

मुझे नहीं बदला 
खुद को ही मेरी हर खुशी के लिए तैयार किया

उदास होती हूँ 
तो वो मुझे हंसाता है
हर पल मेरा साथ निभाता है

ऐसा है मेरा हमसफ़र 
जो बस मुझे चाहता है

और क्यां मांगू खुदा से 
जब ऐसा हमसफ़र किसी को मिलता है 
वो तो बस 
खुदा का शुक्रिया ही अदा करता है
 

शालिनी गुप्ता  









लाडला बेटा

तेरे कदमों से इस घर में खुशियाँ आई है
खिल उठा घर आँगन मेरा
तूने जीवन की बगिया महकाई है

सपने लेकर आयी थी तुझे
सपनो की दुनिया बनाई है
तेरे आने से मेरे सपनो
को मिली सच्चाई है

सूरज की तरह तू चमके
चाँद की तरह अंधेरो को दूर करे
आने से जीवन में तेरे
मेरे जीवन में रौशनी आई है

शान है तू मेरे परिवार की
जान है तू मेरे परिवार की
अधूरी थी बिन तेरे
तेरे होने से जीवन की पूर्णता पाई है

युहीं तू मुस्कुराता रहें
यूहीं इस घर की शान बढ़ता रहे
नाम रोशन करे हमारा
यही दुआ मन से आई है

अभिमान है तू हमारा
तू इस घर की शान है
और तुझमे बसी हमारी जान है


शालिनी गुप्ता

घर की रौनक

दूर होकर भी जो पास रहती है
हर दुख जो माँ बाप से छुपाती है
कुछ भी होने पर दूर होकर भी वो आती है
कुछ भी होने पर पास ना होकर भी वो आती है
वो बेटी कहलाती है

अपने आँसू छुपाकर माँ बाप को हॅसाती है
हर मोड़ पर जो साथ निभाती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप का आँगन छोड़कर दूजा आँगन सजाती है
साथ ही अपने घर की बगिया को भी महकाती है
वो बेटी कहलाती है

रंग बिखराकर जो दो दो आँगन में 
रंगोलियाँ सजाती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप की परछाई जो बन जाती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप के नाम को उचाईयों तक पहुँचती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप का इंतज़ार जो बन कर रहती है
वो बेटी कहलाती है

हर ख़ुशी हर दुःख में जो साथ निभाती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप को सहारा बन जो उनका 
हाथ थामकर चलाती है
वो बेटी कहलाती है


शालिनी गुप्ता 

खुशियों का सफ़र

चलो कुछ जिंदगी से लम्हें उधार लेते है 
चलो आज ज़िंदगी को जीते है
हवाओं को छूते है
आसमां से बात करते है

भागती तितलियों के पीछे भागते है
और परिंदो सी उड़ान भरते है
कुछ भूलकर अनजान बनकर
ज़िंदगी को जीते है

चलो कुछ जिंदगी से लम्हें उधार लेते है

गर्मी से मचलते है
और बारिश में भीगते है
कुछ अनदेखा कर, कुछ अनसुना कर
बस ज़िंदगी को जीते है

नासमझी से चलते है
रात की ख़ामोशियों में
तारों को गिनते है
ज़िंदगी को यू आसां करते है

चलो कुछ जिंदगी से लम्हें उधार लेते है

कुछ सूकून से मिलते है
कुछ सूकून से जीते है
भागती दौड़ती ज़िंदगी में
चलो कहीं रुकते है
और सांसों को गिनते है

यूं ही बीत जाएगी उम्र और ज़िंदगी दोनों
इसे ना यू बर्बाद करते है
इसे आबाद करते है

चलो कुछ जिंदगी से लम्हें उधार लेते है


शालिनी गुप्ता

मेरा प्यार

तू ही मेरा इंतजार 
मेरी आरजू भी तू
रात के अँधेरे में 
रौशनी की किरण भी तू
तेरे बिन कहाँ में 
मेरे बिन कहाँ तू


मेरी हसरत भी तू
मेरी ज़ुस्तज़ू भी तू
तू मेरा हमसफ़र है
तेरे बिन अधूरी हूँ में और 
मेरे बिन अधूरा है तू
 
जीवन की हर राह पर 
साथ निभाया है तूने
राह भी तू और मंजिल भी तू
तेरे बिन कहाँ में 
मेरे बिन कहाँ तू

नाराज भी तुझसे
परेशां भी तुझसे
पर खुशियों की खनखनाहट भी तू
मेरी हंसी की खिलखिलाहट भी तू 
ज़िंदगी है तुझसे
जीने की वजह भी तू
तेरे बिन कहाँ में 
मेरे बिन कहाँ तू

तुझमे हूँ में और मुझमे है तू
तेरे बिन कहाँ में 
मेरे बिन कहाँ तू


शालिनी गुप्ता

ज़िंदगी एक पहेली

ज़िंदगी अनबूझी पहेली है
इसे खुद ही सुलझाना है
ज़िंदगी खाली और सूनी है
तो खुद ही उसे सजाना है
प्यार के नग्मे गाकर 
उसको खुद ही दिलचस्प बनाना है

अकेले हैं 
तो खुद ही अपने लिए समय लगाना है
हर बात का हल है
हमें सवालों में नहीं खुद को उलझाना है
कुछ अपने और कुछ लोगों के साथ
संबंध जोड़कर इस ज़िंदगी को बिताना है

खुद को मायूस और उदास न रख
खुशिओं को अपनी खुद ही ढूंढ कर पाना है

आसां तो नहीं है ज़िंदगी का सफर
 
उम्र के एक पड़ाव के बाद
हमें इसे आसां बनाना है
इसे हमें खुद ही आसां बनाना है


शालिनी गुप्ता 

माँ ही है जो

माँ ही है जो 
आँचल मे छुपाकर धुप छाँव से बचाती है

माँ ही है जो 
हर तूफां से बचाती है

माँ ही है जो 
हमारे हर नाज़ नखरे उठाती है

माँ ही है जो 
अपनी दुआओं से हमें हर बला से बचाती है

माँ ही है जो 
काला टिका लगाकर हर बुरी नज़र से हमें बचाती है
माँ है तो घर मे आवाज आती है

माँ ही है जो 
पास ना होकर भी हमारे अहसासों में हमारे साथ रहती है

माँ ही है जो 
अंधेरो से निकालकर हमें रौशनी दिखाती है

माँ ही है जो 
हमारी एक आहट पर सोते हुए भी जग जाती है
 
माँ है तो ज़हाँ में अपनापन लगता है
माँ है तो ये संसार अपना सा लगता है


शालिनी गुप्ता

मन ही तो है

कुछ परेशां सा हो जाता है
कुछ घबरा सा जाता है
मन ही तो है
कहाँ संभल कर रह पाता है
 
भागता है खुशिओं के पीछे
सामना ग़मों से हो जाता है
मन ही तो है
कहाँ रुक कर रह पाता है
 
भागता रहता है ये हर परिस्थिति से
सब कुछ अपने हिसाब से ही चाहता है
पर कुछ भी तो नहीं अपने हाथ में
ये कहाँ समझ पाता है

मन ही तो है
 
मचल जाता है
यूं ही फिसल जाता है
अपने हाथ में कहाँ ये रह पाता है
 
जीवन को जीने का मर्म
कहाँ ये समझ पाता है
कितने समझौते कितनी परेशानियों 
से ये बचना चाहता है
हर हाल में ख़ुद को बस में रखकर 
चल पाना कहाँ इसको आता है
 
मन ही तो है 
मचल ही जाता है


शालिनी गुप्ता 

पहचान ज़िंदगी की

चलो यूँ ज़िंदगी आसां हो गई
कुछ अपनों की पहचान हो गई
दुनिया मे जीने की चाहत और अंजान हो गई
ज़िंदगी के जीने का कुछ यूं अंदाज बनाते है 
ज़िंदगी को थोड़ा अजनबी बनाते है 

अजनबियों से दूरियां रहें भी तो कोई गम नहीं 
ज़िंदगी लगता है जैसे अब 
अजनबियों  के बीच ही बिताते है 

थोड़ा दर्द भी कम होगा 
थोड़ा बोझ भी दिल का कम होगा 
चलो अब अजनबियों से ही दोस्ती बढ़ाते है 
ज़िंदगी को कुछ यूँ आसां बनाते है 

अपने ही दे रहे जख्म और गम 
तो लगता है अपने ही हों कुछ कम 
चलो अपनों से दूरियां बढ़ाते है 
और अजनबियों के साथ ही ज़िंदगी बिताते है
और ज़िंदगी तुझे आसां  बनाते है 

ज़िंदगी तुझे आसां  बनाते है 
प्रकर्ति के नियमो को अपनाते है 
ना कुछ एक सा था 
ना कुछ एक सा रहेगा 
ये ही प्रकृति के नियम समझाते है 
चलो ज़िंदगी तुझे यूँ आसां  बनाते है 


शालिनी गुप्ता 


२. 
ज़िंदगी अनभुजी पहेली है 
ऐसे खुद ही सुलझाना है 
ज़िंदगी खाली और सूनी है 
तो खुद ही उसे सजाना है 
प्यार के नग्मे गाकर उसको खुद ही दिलचस्प बनाना है 

अकेले है तो खुद ही अपने लिए समय लगाना है 
हर बात का हल है 
हमें सवालों में नहीं खुद को उलझाना है 
कुछ अपने और कुछ लोगों के साथ 
सम्बन्ध जोड़कर इस ज़िंदगी को बिताना है 

खुद को मायूस और उदास न रख 
खुशिओं को अपनी खुद ही ढूंढ कर पाना है 
आसां तो नहीं है ज़िंदगी का सफर 
उम्र के एक पड़ाव के बाद 
पर हमें इसे आसां बनाना है 
इसे हमें खुद ही आसां बनाना है 

३. 
माँ ही है जो आँचल मे छुपाकर धुप छाँव से बचाती है 
माँ ही है जो हर तूफां से बचाती है 
माँ ही है जो हमारे हर नाज़ नखरे उठाती है 
माँ ही है जो अपनी दुआओं से हमें हर बला से बचाती है 
माँ ही है जो काला टिका लगाकर हर बुरी नज़र से हमें बचाती है 
माँ है तो घर मे आवाज आती है 
माँ ही है जो पास ना होकर भी हमारे अहसासों में हमारे साथ रहती है 
माँ ही है जो अंधेरो से निकालकर हमें रौशनी दिखाती है 
माँ ही है जो हमारी एक आहट पर सोते हुए भी जग जाती है 
माँ है तो ज़हाँ में अपनापन लगता है 
माँ है तो ये संसार अपना सा लगता है 

४.
कुछ परेशां सा हो जाता है 
कुछ घबरा सा जाता है 
मन ही तो है 
कहाँ संभल कर रह पाता है 
भागता है खुशिओं के पीछे 
सामना ग़मों से हो जाता है 
मन ही तो है 
कहाँ रुक कर रह पाता है 
भागता रहता है ये हर परिस्थिति से 
सब कुछ अपने हिसाब से ही चाहता है 
पर कुछ भी तो नहीं अपने हाथ में 
ये कहाँ समझ पाता है 
मचल जाता है 
यूं ही फिसल जाता है 
अपने हाथ में कहाँ ये रह पाता है 
जीवन को जीने का मर्म 
कहाँ ये समझ पाता है 
कितने समझौते कितनी परेशानियों से ये बचना चाहता है 
हर हाल में ख़ुद को बस में रखकर चल पाना कहाँ इसको आता है 
मन ही तो है मचल ही जाता है 









मेरी बिटिया, मेरा आँगन

 
मेरी बिटिया, मेरा आँगन 
तू ही मेरा मान, तू ही मेरा अभिमान 
सबसे बड़ा यकीन,
तू ही मेरा जाहांन, तू ही मेरी पहचान है 

तेरी किलकारिआं वो नटखट बातें 
वो तेरा मुझसे रूठ जाना 
और अपनी हर बात 
कभी हंसकर और कभी रोकर मनवाना 

तेरी खुशीआं ही मेरी पूजा 
मेरी आराधना
तू ही मेरे जीवन की सबसे प्यारी साधना 

तु हि मेरी दुनिया, मेरा मान 
तेरी हंसी से रोशन मेरा जीवन 
तू ही  मेरी धड़कन
तु हि मेरा धैर्य , मेरा मन 

मेरी नन्ही पारी, अब हो गई हे बड़ी 
मेने पकड़ा तेरा हाथ हर राह पर 
अब वो हाथ थमा है सचिन ने प्यार कर 

मेरी बेटी 
में वो दरख्त हूँ जो तुझे हमेशा छाँव देगा 
तेरे हर कदम पर, मेरी दुआ, मेरा साया साथ रहेगा 
चाहे तू दूर हो, दिल के पास रहेगी 
पापा का प्यार हमेशा तेरे साथ रहेगा 
हमेशा तेरे साथ रहेगा 

नो मटर व्हाट 
में कल भी तेरे साथ था, आज भी हूँ 
और कर भी तेरे साथ रहूँगा 
लव यू. 

राज गुप्ता 



मोहब्बत

चलो एक बार फिर एक दूजे से मिलते है 

एक दूजे की कमीओ को भूलकर
एक दूजे की खुबीओ को देखकर
फिर एक बार साथ चलते है
 
तिनके तिनके बुनकर फिर प्यार का घरोंदा बनाते है
और अपने आशियाँ को पाते है
बोहत कुछ सीखा एक दूजे से
चलो अब और कुछ नया सीखते है
 
बोहत कुछ पाया एक दूजे से
फिर एक दूजे तो कुछ देते है
कमी तुझ में भी है
कमी मुझ में भी है
नया सफर नई शुरूवात
फिर एक बार करते है
चलो एक बार फिर एक दूजे से मिलते है

खुदा ने बनाया जो साथ
फिर उस साथ को जीते है
चलो फिर हमसफ़र बनकर
अपनी नई मंजिल की और चलते है

कमी तुझ में भी है
कमी मुझ में भी है
सम्पूर्ण तो कोई नहीं होता
कमियों से सिखकर पूर्ण जिंदिगी को करते है
चलो एक बार फिर एक दूजे से मिलते है

शालिनी गुप्ता

घरोंदा

ज़िंदगी का रंग एक सा कभी नहीं रहता
तूफान आ कर चला जाता है
उसके पीछे का संसार फिर कैसे बन पाता है
कुछ यादे मीठी कुछ कड़वी सी मिलकर रह जाती है
जो बन जाती है जीवन भर की यादे रह जाती है
तूफान के बाद का मंजर कुछ यू हो जाता है
घरोंदे जो उजड़ गए वो कहाँ बन पाते है
कुछ नई यादें जोड़ कर फिर नये घरोंदे बनाते है
कुछ भी थमता नहीं प्रकर्ति के नियम भी निराले है
गुलाब है जो कहीं मय्यत पर
तो कहीं किसी के बालो पर भी सजाते है
कड़वी और मीठी यादों को मिलकर
गुलाब की तरह इंसां कहाँ बन पाते है
जो काँटों में भी रहकर खुशुबू बिखराते है
इंसान कहाँ तूफान के बाद यूँ उठ पाता है
और गुलाब की तरह तूफान में भी खिल पाता है
तूफान तो बस आ कर चला जाता है
उसके पीछे का संसार इंसां खुद ही बसाता है

शालिनी गुप्ता


ज़िंदगी एक पहेली

जीना है तो चलो कुछ यूँ जीते है
मायूसीओ को पीछे छोड़
मुस्कुहराहटो से आगे बढ़ते है
जीना है तो कुछ यूँ जीते है
परेशानिओ से न घबराकर
उनका समाधान ढूंढ़ते है
क्यूँ हमे कुछ परेशां करे
चलो हम खुद को ही बदलते है
जीना है तो कुछ यु जीते है
समझकर न हर चीज़ को
कुछ नासमझ बनकर चलते है
आसान हानि है जीवन को समझना
तो उसे बिना सोचे समझे ही जीते है
कुछ मकसद बनाकर जीवन का
उसे पूरा करते है
जीना है तो चलो कुछ यूँ जीते है
परिंदो की तरह आसमां में उड़कर
ज़मीं को छूते है
जीवन को इस तरह जीते है
फूलों की तरह समर्पित होकर
उसकी खुशबू को बिखेरते है
किसी का सहारा
किसी की उम्मीद
किसी का दामन
खुशिओ से भरते है
जीना है तो कुछ इस तरह जीते है
शालिनी गुप्ता



उम्मीद की किरण

नया सफर है नई है राहें 

अनजानी डगर है मंजिल किधर है 

चलकर राहों पर मंजिल को ढूंढना होगा 
सफर है कठिन पर इस सफर पर चलना तो होगा 
मुश्किल है मगर संघर्ष भी थोड़ा करना होगा 
ज़िंदगी है अनभुझी पहली ऐसे हल तो करना ही होगा 

होकर मजबूत गिर गिर कर संभालना तो होगा 
विश्वास और उम्मीद की किरण  से 
अपने सूरज तक पहुंचना होगा 
हारकर भी खुद से हमेशा जितना ही होगा 
ज़िंदगी के इस सफर पर चलकर 
अपनी मंजिल तक खुद पोहचना ही होगा 


शालिनी गुप्ता 





मेरा हमसफ़र

मेरा हमसफ़र 


खुद से भी ज़्यादा मेरी परवाह करता है 
अपनी हर ख़ुशी से पहले वो मेरी ख़ुशी चुनता है 
अपने से पहले वो मुझे रखता है 
ऐसा है मेरा हमसफ़र 
जो मेरे लिए अपनी राहें और खुद की मर्ज़ी को भी बदलता है 
मेरी लिए वो जीता है 
मेरी पर ही मरता है 
और क्या मांगू खुदा से 
जब ऐसा हमसफर किसी को मिलता है 
वो तो बस खुदा का शुक्रिया ही अदा करता है 

शालिनी गुप्ता 



ज़िंदगी एक लहर

लहरों की तरह हूँ में 
खामोश समुन्दर को भी आवाज देती हूँ 
ज़िंदगी को भी लेहरों की तरह ही में जीती हूँ 
खामोश बैठना नहीं आता मुझे
मचलती रहती हूँ 
लहरों  की तरंहा कभी हवाओं से सुन कर चलती हूँ 
कभी खुद की आवाज़ ही सुनती हूँ 

जीवन को यूँ चुपचाप नहीं 
उसमे कुछ हलचल कर के चलती हूँ 
सीखकर लहरों से में उठक पटक ज़िंदगी की करती हूँ 
बनाकर रेत पर घरोंदा 
उसे लहरों से बचाती चलती हूँ 
नादाँ लहरों से कभी खेलती हूँ 
कभी उनसे बचती हूँ 
मनचली लहरों की तरह जीवन जीती हूँ 
और यूँ संन्नाटो में लहरों की आवाज़ को सुनती हूँ 
में ज़िंदगी को लहरों की तरह ही जीती हूँ 

शालिनी गुप्ता 




तू रक्षक, तू ही रखवारा

तूने ही बिगाड़ा है 
अब तू ही संवारेगा 
तेरे नाम से जीवन का पल पल यह गुजारा है 

आस  है तू मेरी 
विश्वास हमारा है 
तूने ही हराया है 
अब तू ही जितायेगा 

तेरे नाम से जीवन का पल पल यह गुजारा है 
तेरे ही चरणों में अब मेरा सहारा है 
मैं दास हूं तेरा दाता तू हमारा है 
तू जो अपना फिर कौन पराया है 
बिन तेरे कहां जाऊं ना कोई सहारा है 
तू रक्षक है मेरा तू ही रखवारा है 
तेरे नाम से जीवन का पल पल यह गुजारा है 

तेरी ही कृपा से जीवन ये हमारा है 
तू पास है जो मेरे फिर कहां अंधियारा है 
तेरी ही रोशनी से रोशन यह जहां सारा है 
तेरे ही चरणों में जीवन यह गुजारा है 

शालिनी गुप्ता 

बहती जीवन धारा

हर रात अंधियारी है
हर दिन उजियारा है
हर निराशा अंधियारी है
हर आशा उजियारा है
हर नाउम्मीदी अंधियारी है
हर विश्वास उजियारा है

जीवन का यही सार ये सारा है
सत्य है जीवन का यही ये सारा है

पानी की तरह बहती ये जीवन धारा है
रुकता नहीं कुछ भी ना कुछ कभी ठहरा है
रोशनी सूरज की और रात का अँधियारा दोनों का ही संदेश ये सारा है

समय का चक्र चलता ये यह सारा है
जो गम और खुशियों दोनों का साँझा बटवारा है
रोक नहीं सकता कोई प्रकृति के नियमों को
खेल ये प्रकृति के नियमों का सारा है
चमत्कार भी होते हैं अगर विश्वास रखो खुदा पर
जिंदगी का खेल ये सारा है
गर हार हमारी है तो जीत का विश्वास भी हमारा है


शालिनी गुप्ता

ठहराव

हर उन्मुक्त परिंदे को आसमां चाहिए
इसी तरह हर इंसान को एक पहचान चाहिए
आसमां है परिंदों और इंसा दोनों के लिए
बस हर किसी को एक उड़ान चाहिए

इंसां भी परिंदो की तरह उन्मुक्त होकर ही जीना चाहता है
न कोई बंधन न कोई बेचैनी
इंसां भी तो बस उड़ना ही चाहता है

उड़ान चाहे विचारो की हो
चाहे कदमो की हो
बस हर चीज़ को छोड़कर
हर कोई अपने आसमां को छूना चाहता है
जीना चाहता है खुलकर और
बस अपने मकसद को छूना चाहता है
  
परिन्दे तो ज़मीं पर आते है कभी कभी
पर इंसां तो आसमां में ही उड़ना चाहता है
अपना अस्तित्व और अपना वज़ूद पाने के लिए ज़मीं को छोड़ना चाहता है

आसमां को छूने के लिए परिंदो की तरह ज़मीं को भी अपनाना होगा
उड़ते उड़ते वह भी बनाते हैं घरौंदा अपने लिए इसलिए
इंसान को भी घरौंदा तो बनाना होगा
आसमां को छूने के लिए जमीन पर भी तो कदमों को लाना होगा और
अपना एक आशियां बना फिर अपने आसमां को पाना होगा

शालिनी गुप्ता 


  


अंदाज़े ज़िंदगी

ज़िंदगी तुझे बस अब जीना चाहती हूँ
बादल है भी तो गम के बादलों को हटाकर
उन्हें बारिश की बूंदों  से भिगोना चाहती हूँ
हर छोटी छोटी खुशियों को संजोना चाहती हूँ
सब कुछ पीछे छोड़कर आगे बढ़ना चाहती हूँ
ज़िंदगी तुझे बस अब जीना और जीना चाहती हूँ

ज़मीं पर पैर रखकर आसमां की ऊँचाइयों को छूना चाहती हूँ
ज़िंदगी तुझे बस अब जीना चाहती हूँ
ख्वाब कुछ ऐसे देखें भी नहीं पर जो भी है
उन  ख़्वाबों को सच होते देखना चाहती हूँ
प्यार से बढ़कर तो कुछ भी नहीं
बस उसी प्यार को थामकर चलना चाहती हूँ
ज़िंदगी तुझे बस अब जीना चाहती हूँ

मुश्किल तो है पर नामुमकिन नहीं
रास्ता तो है गर मंजिल भी नहीं
इसलिए राह पर चलना चाहती हूँ
ज़िंदगी तुझे बस अब जीना चाहती हूँ

शालिनी गुप्ता 





रंगबिरंगी ज़िंदगी

ज़िंदगी नाम है गर, संघर्ष और द्वन्द का
तो मंजिल तक हमें खुद ही जाना है
खुद को ना परेशां कर , खुद को ना बेचैन कर
ज़िंदगी को अभी तो थोड़ा ही जाना है 

राहें मुश्क़िल भी होंगी
मंजिल दूर भी होगी
पर कदमो को हमें तो हमेशा आगे ही बढ़ाना है 

उदासी और मायूसी को भी अपनी हमें खुद ही तो मिटाना है
ज़िंदगी सब कुछ नहीं देती
हमें ज़िंदगी से खुद ब खुद लेते जाना है 

बाँट दे खुशियाँ सबको 
ग़मो को भी तो झोली में अपनी सजाना है
सूरज की तपन के बाद बारिश की बूंदो के अहसास को
तभी तो हमने जाना है 

हाँ मुश्किल तो है ये सफर
पर इस सफर को हमें हँसते हँसते हंसी बनाकर बिताना है 
ज़िंदगी में, मुश्किलें तो है थोड़ी
पर आंसा भी उन्हें हमें खुद ही बनाना है

हारना नहीं हमें किसी से, चाहे हालत हो या मुसीबतें 
हमें हर राह पर बस आगे बढ़ते जाना है 
और ज़िंदगी के इस सफर को आसां बनाना है 

शालिनी गुप्ता 


आँगन की बहार

तूने मुझे संवारा
तूने मेरा घर संवारा
बिन तेरे सूना मेरा घर बार है
तेरे होने से घर में मेरे बहार है 

हर त्यौहार सूना है बिन तेरे 
तेरे घर में होने से  
सजा मेरा हर त्यौहार है 

सफलता की सीढ़ियों पर 
चलना शुरू किया है तूने 
ऊँचाइयों और बुलंदियों पर पहुंचना है 
तुझे  अभी बहुत  सोच समझकर 
हर राह पर चलना है 
मुश्किलें भी होंगी राहों में थोड़ी 
पर हाथ थाम कर हमारा 
तुझे हर मुश्किल से गुजरना है 

दुआ है आरज़ू भी ये है हमारी 
तू खुश रहे हमेशा 
तुझे हमारी हर खुशियों को भी खुश रखना है 

ए प्यारी, नन्ही सी बेटी हमारी 
क्या दू मै तुझे 
तूने मुझे सब कुछ दिया 
हर ख़ुशी हर ख्वाब तूने मेरा पूरा किया 

अब तुझे अपनी मंजिल पर पहुंचना है 
सफलता बाहें थामे तेरी 
और तुझे आगे बढ़ना है 

तूने मुझे संवारा 
तूने मेरा घर संवारा
बिन तेरे सूना मेरा घर बार है
तेरे होने से घर में मेरे बहार है 

शालिनी गुप्ता 

भजन - मेरे सांवरे

मेरे सांवरे, मेरे सांवरे
जप लूँ जप लूँ तेरा नाम रे 

देखूँ जब जब सूरत तेरी 
तूने कर दिया है दीवाना 
तेरी मूरत मन में मेरे  रहती 
हर पल हर काम में 
तेरी मूरत मन में मेरे  रहती 
हर पल हर धाम में 

तेरी जिस पर पड़  जाए दृष्टि 
तो हिल जाती है धरती 
जग में गूंजे तेरा नाम रे 
जप लूँ जप लूँ तेरा नाम रे 

मेरे सांवरे, मेरे सांवरे,
जप लूँ जप लूँ तेरा नाम रे 

तेरा होकर है मुझे रहना 
मुझे तू अब कुछ नहीं कहना 
तेरी भक्ति मेरी शक्ति 
तेरा जप लू मैं नाम रे 

मेरे सांवरे, मेरे सांवरे,
जप लूँ जप लूँ तेरा नाम रे 

शालिनी गुप्ता 

जीत विश्वास की

वक्त के आगे सब हार गये है
वक्त के सामने इंसां बेचारा हो गया है 
बेबस लाचार और बेसहारा हो गया है 

कब ये वक्त बीतेगा 
कब ये तूफां खत्म होगा 
कब तक आखिर खुदा
इंसां का यूं ही इम्तिहां लेगा 

कब तक यूं ही इंसां  
इन हालातो का सामना करेगा 
इंसां ही तो है, बेचारा 
कब तक यूं  ही इस वक्त के बीत जाने का इंतजार करेगा 

पर वक्त कभी एक सा नहीं रहता 
बहती नदिया की तरह ये भी थमा नहीं रहता 
इंसां  को तो चलते रहना होगा 
जीवन कभी ठहरता नहीं है 
इसी तरह इंसां  भी कभी हारता नहीं है 

गिरता है, उठता है फिर हालातों का सामना भी करता है 
तूफां के चले जाने और वक्त के बीत जाने का इंतजार करता है 
हालात जो आज है, वो न कल रहेंगे 
हर अँधेरे के बाद सहर है 
ये इंसां  दोहराते रहेंगे 

फिर बनेगा आशियां 
फिर उजाला होगा 
इन नाकाम कोशिशों को तो 
कामयाब होना ही होगा 

शालिनी गुप्ता 

मातृत्व


माँ होने का पहली बार तूने ही अहसास कराया 
जब लिया तुझे  पहलू में, तो ममता को है तूने जगाया 
जब से आयी जीवन में, तूने मेरे घर आँगन को महकाया 
माँ का दर्द क्या होता है ये माँ बनने पर ही समझ में आया 

माँ गर, जननी है तो बच्चे उसके जीने का अहसास है 
माँ की आँखों के तारे और माँ के दो हाथ है 
बच्चे माँ से नहीं माँ बच्चों से ही बनती है 
उसके जीवन की परिभाषा उन्हीं से निकलती है 

माँ ख़ुश है गर तो ये, इस बात की पहचान है 
कि उसके बच्चे ही उसकी जां है 
बच्चे गर, सफल है तो सफल होती है एक माँ 
दुनिया में इसी से उसकी पहचान होती है 
माँ में बच्चो की और बच्चो में माँ की जां होती है 

हर बच्चा इंसा के दर्द को समझें 
गर, उसमे इंसानियत की प्रीत है 
यही हर माँ की जीत है 

बच्चे गर पूर्ण है माँ के साथ 
तो माँ भी बच्चो के बिना कहाँ संपूर्ण  है 

माँ गर, नियामत है खुदा की 
तो बच्चे भी उसी की ही दी सबसे बड़ी देन है 

शालिनी गुप्ता 


अहसास प्यार का

मेरा श्रृंगार तुझ से है
मेरे माथे की बिंदिया की चमक तुझ से
मेरी पायल की झंकार तुझ से है
मेरा परिवार तू, मेरा घरबार तू
मेरा तो संसार तुझ से है

मेरा प्यार तू, मेरा इकरार तू
मेरे ऑंगन की बहार तू
मेरे ऑंगन का तो गुलजार तुझ से है

तेरी आँखों में प्यार बन कर रहती हूँ
तेरे दिल में जान बनकर रहती हूँ
मेरा तो दिल और जां तुझी से है

और क्या कहूँ हमसफर मेरे
मेरे जीवन की झंकार तू
मेरा हर श्रृंगार तू
मेरा तो सारा संसार तुझी से है

शालिनी गुप्ता 








वक्त की जंग

वक़्त फिर तूफ़ा का आया है 
फिर वही भयानक मंजर छाया है 

हर इंसां को बच कर चलना है 
आँधियों के रुख को मोड़ना है 

फिर एक वीर सिपाही की तरह 
युद्ध के  मैदान पर खड़े होकर 
इस जंग को तो अब लड़ना है 

जीत होगी ये विश्वास रखना है 
उम्मीद का हाथ अब नहीं छोड़ना है 
मायूसी भी है छाई 
उदासी है घर घर आयी 

फिर भी खुशियों का इंतज़ार तो करना है 
यू इंसां को नहीं हार कर चलना है 

आस का, विश्वास का, दामन थामे रखना है 
डर कर नहीं, लड़ कर, इस जंग को जीतना  है 

अब जिंदगी  का सामना आत्मविश्वास 
और खुद के साथ से ही करना है 
जीतना है खुद से हर पल 
और खुद को ही जीतना है 

शालिनी गुप्ता 

अनुभूति

मान हो तुम मेरा
तुम मेरा अभिमान हो
होठों की मुस्कराहट हो मेरी
तुम ही जान, तुम ही जहां हो

जीने की चाहत तुम हो
जीने का अहसास तुम हो
मेरी तो हर सांस तुम हो

प्यार से अपने जीना सिखाया
जीने का अंदाज़ दिखाया
हार कर खुद को तुमने
मुझे जीतने का अहसास कराया

ख़त्म थी ज़िंदगी मेरी बिन तुम्हारे
तुमने इसको शुरू करके
हाथ में मेरे, अपना हाथ थमाया

और क्या मांगू तुमसे
तुम ही मेरा सब कुछ
तुम ही  मेरा पूरा जहां हो

आँखों में नये सपने दिखाए
हर सपने को पूरा कराया
ज़िंदगी को हर पल अधूरा होते हुये
तुमने इसे सम्पूर्ण बनाया

हर पल ज़िंदगी को जीया
मेने तुम्हारे साथ
तुमने हर पल सुनहरा बनाया

तुमने दिया सब कुछ मुझे
मेरा एक वजूद बनाया


शालिनी गुप्ता


जीने की चाहत

क्यूँ नहीं अपने से ही लड़ पाता इंसां
क्यूँ अपने से ही हार जाता है इंसां
ज़िंदगी तो नियामत है
ये देन है खुदा की
क्यूँ उसे नहीं जी पाता इंसां

दर्द गर जीने में है
दर्द तो मरने में भी है
फिर क्यूँ नहीं ये दर्द सह पता इंसां

हाथ तो बहुत है हौंसले देने के लिए
क्यूँ फिर अपना ही हाथ नहीं बढ़ा पाता इंसां
संघर्ष है तो करो उसे
क्यूँ उस संघर्ष से घबराता है इंसां

अपने लिए नहीं तो
दूसरो  की खुशी के  लिए ही
क्यूँ नहीं कुछ कर जाता इंसां

किसी की दुआ बनकर
किसी की आँखों का सपना बन
क्यूँ नहीं किसी की मुस्कराहटों में रह पता इंसां

मौत तो कोई हल नहीं किसी भी समस्या का
क्यूँ नहीं इस समस्या का समाधान निकाल पाता इंसां

मकसद तो बहुत है जीने के लिए
क्यूँ नहीं एक मकसद बना पाता इंसां

क्यूँ यूं, ज़िंदगी से भागकर
कहाँ जाता है  इंसां
क्यूँ नहीं अपने से ही लड़ पाता इंसां

शालिनी गुप्ता 

मेरी बेटी

आज मेरी बेटी, बड़ी हो गई है
थोड़ी अल्हड़, थोड़ी नकचढ़ी हो गई है
संभाला था जिसको दामन में अपने
आज वो मेरे दामन से बड़ी हो गई है

सहारा बनकर वो आज मेरे साथ खड़ी हो गई है
उजाला है वो मेरे घर का
हर अँधियारे को मिटाकर
वो एक सूरज की किरण हो गई है
आज मेरी बेटी बड़ी हो गई है

उंगलियां पकड़कर चलना सिखाया था जिसे
आज वो हाथ हमारा थामकर खड़ी हो गई है
हर मुश्किलों को पर कर वो
जिंदगी की सीढ़ियों पर चढ़ती उतरती
ज़िंदगी में अब और भी परिपक्व हो गई है

ज़िंदगी के हर सफर में
मुस्कुराकर चलना सिखाया जिसे
वो इस सफर पर अब
हंसकर चलना शुरू हो गई है
आज मेरी बेटी बड़ी हो गई है


शालिनी गुप्ता


जीवन के रंग

कभी कभी मायूसी छा जाती है
कभी कभी उदासी भी आ जाती है

ज़िंदगी कहाँ तू एक सी रह पाती है
कभी धुप कभी छाँव की तरह आ जाती है
मौसम की तरह रंग बदलते है तेरे भी
तू भी कहाँ एक रंग ला पाती है
कभी सुख कभी दुःख  कितने पहलु है तेरे
तू भी कहाँ एक रुख रख पाती है

ये इंसा ही तो है
जो तेरे हर रूख का सामना करता है
कभी गिरता है, कभी बिखरता है
फिर उठकर अपने होंसले से 
तुझे जीता है

तुझे जीने की ख्वाहिश को नहीं कभी तोड़ता है
तेरे हर पहलु, तेरे हर रुख का सामना भी करता है
तेरे दामन में ही अपना सर रखकर रोता है

जीता है तुझे खुद में
और जीने  का अंदाज़ औरो को देता है
उदास होकर भी मायूस होकर भी
किसी भी रूप में
तेरे हर रूप को जीता है

शालिनी गुप्ता

बढ़ती दूरियां

बेज़ुबाँ  सा सारा  जहां  हो गया है.       
इंसा से ही इंसा के दरमियां फ़ासला यहां हो गया है      

हालात तो ये ना थे
इंसा  से जुदा, तो इंसा ना थे
कुछ तो था अहसासों का, जज्बातों का सिलसिला
पर आज का ये वक्त हमें कहाँ  ले चला

कुछ तो इंसा खुद ही अलग हो चला था
आज वक़्त ने उसे खुद ही अलग कर दिया
खुद अपने ही नामोनिशां छोड़ कर जाता था इंसा
आज तो  वक्त ने इंसा  का ही नामोनिशां कम कर दिया हैं

इससे इंसा को सीखना होगा 
कि आपस मे हमेशा मिलकर ही  चलना होगा  
यू दूरियां, यूँ फ़ासले ना बढ़ाए 
जो इंसा ही इंसा को देखने को  तरस जाये

वक़्त जो आज हैं वो कल ना होगा 
ये इंसा को अब समझना होगा 
प्यार को, जज्बातों को, अहसासों को बढ़ाए
ताकि कल दूरियां बना कर खुद  
एक दूसरे से ही जुदा ना हो जायें 

बेजुबां सा सारा जहां हो गया हैं 
इंसा से ही इंसा के दरमियाँ फ़ासला यहां हो गया हैं 


शालिनी गुप्ता 

उम्मीद की किरण


अँधेरे को मिटाकर
रोशनी की किरण को  बाहर आना होगा 
युद्ध  बाहर भी है, अंदर भी है 
मन के इस युद्ध को हार कर भी जीत जाना होगा 

इस युद्ध को, इस द्वंद को अपने से भी जीत जाना होगा 
निराशा को हराकर, आशा को जीताकर 
खुद से ही खुद को जीताना होगा 

मोत के सत्य को देखकर भी 
ऐ ज़िंदगी तुझे तो जी जाना ही होगा 

पक्षियों से कला जीने की सीखो 
घरौंदा बार बार टूटता है उनका 
पर होंसला नहीं छूटता उनका 

हर बार टूट टूट कर भी घरौंदो को बना लेते है 
ये इंसां है जो हौसलों  को हरा लेते है 
उनसे सीखकर ही अपने घरौंदो को 
टूटकर भी बनाना सीखना ही होगा 
ऐ ज़िंदगी तुझे तो जी जाना ही होगा 

उम्मीद के दिये को अभी बुझने नहीं देना होगा 
सैनिक जो खड़े है सरहदों पर मौत की 
उनके होंसले को देखकर 
मौत को जीतकर उनकी तरह ही जीना होगा 
सरहदों को अपनी बचाना होगा 
घरौंदो को अपने बनाना होगा 

कब तक यूं मर-मर के जीये 
उम्मीद के, आशा के दिये को जलाना होगा 
ज़िंदगी तुझे घुट घुट कर नहीं 
खुल कर अब तो जी जाना होगा 
उम्मीद के दियों को जलाना होगा 
ज़िंदगी तुझे ज़िंदादिली से 
अब जी जाना होगा 

शालिनी गुप्ता 


समर्पण [ ईश्वर भक्ति]

कोई भी नहीं हमारा
एक तेरा ही सहारा
कोई भी नहीं हमारा
एक तेरा ही सहारा

सारी मुशिकल हल हो जाती
विपदा कोई नहीं है आती
हर मुसीबत से उभारा

एक तेरा ही सहारा
कोई भी नहीं हमारा

मन मे तेरा हो बसेरा
ना रहे कोई अँधेरा
तेरे नाम का हो उजियारा

एक तेरा ही सहारा
कोई भी नहीं हमारा

तू जो है गर साथ मेरे
मे क्यूँ  तन्हा ही रहूँ
तेरे साथ से है गुजारा
तेरे पास है जग ये सारा

एक तेरा ही सहारा
कोई भी नहीं हमारा
एक तेरा ही सहारा

शालिनी गुप्ता 

जीवन एक संघर्ष

जिंदगी आसां नहीं है
पर उसे न मुश्किल बनाना होगा
गर संघर्ष है हर कदम पर
तो होंसलो को भी चंद बढ़ाना होगा

गर थक भी जाये हम अगर
बिखर  भी जाये, हम अगर
पर मंजिल को तो हमें पाना होगा

आसां नहीं है ये सफर
तो सफर को भी रंगी बनाना होगा

ठोकरे ही सीखाती है जीवन जीने का हुनर
इससे डरकर नहीं हमे बैठ जाना होगा
ठोखरो से ही सीखकर
हमें आगे बढ़ जाना होगा

रुकना नहीं, थमना नहीं
यही है जीवन का फलसफ़ा
इसे हमें अपनाना होगा

ना डरकर, ना मरमरकर
हमें जिंदगी की डगर पर
जिंदादिली से चलते जाना होगा 

जिंदगी आसां नहीं है
पर उसे न मुश्किल बनाना होगा

___शालिनी गुप्ता 

प्रेम धुन [कृष्णा भक्ति]

तू मेरा है सांवरियां
मै तेरी हु बावरियां
किस और मैं कैसे जांऊ
तू ही मुझको बतलादे

किस और मैं कैसे आऊं
तू ही मुझको समझादे

तुझे मेवा खीर खिलाऊ
या माखन मिश्री लाऊँ
किस चीज़ का भोग लगाऊं
तू ही मुझको बतलादे

राधा की पायल लाऊँ
मीरा की वीणा बजाऊ
किस चीज से तुझे रिझाऊ
तू ही मुझको बतलादे

तुझे मन मे अपने बसाऊ
तेरी भक्ति मई खो जाऊ
कैसे मै तुझको पाऊ
तू ही मुझको बतलादे

तुझे मोहन कहके पुकारू
कान्हा कान्हा चिल्लाऊं
किस नाम से तुझे  बुलाऊ
तू ही मुझको बतलादे

कैसे मै तुझको पाऊ
तू ही मुझको समझादे
कैसे मैं तुझ तक आऊ
तू ही मुझको बतलादे

तू मेरा है सांवरियां


शालिनी गुप्ता





मेरा हमसफ़र

कभी ज़िंदगी में कोई कमी होने नहीं दी
आँखों में तूने कभी नमी होने नहीं दी

राहे कितनी भी मुश्किल क्यूँ ना हो
तूने ज़िंदगी में कोई मुश्किल होने नहीं दी

हर कदम साथ चला तू मेरे
कभी ज़िंदगी में तन्हाई होने नहीं दी

हर बात पढ़ ली मन के पन्ने की तूने
ज़िंदगी एक किताब बनने ही नहीं दी

पास हर पल रहा तू मेरे
दूर होने की तम्मना कभी होने ही नहीं दी

ज़िंदगी की हर खवाहिश पूरी की तूने
ज़िंदगी अधूरी होने ही नहीं दी

कभी ज़िंदगी में कोई कमी होने नहीं दी

शालिनी गुप्ता

एक मौहब्बत ऐसी भी

यूं तेरा ख़यालों मे आना
और आके ख्यालो मे
झट से चले जाना

मेरा तुझे भूलना चाहना
पर चाह कर भी तुझे न भुला पाना

यूं तो आसमां मे उड़ रहा हूँ मै
पर दिल मे तेरा ही ख्याल है
तू दूर होकर भी मेरे पास है
मैं तेरा और तू मेरा विश्वास है

यू तो कोलाहल भी है आस पास
और साथ मे  है एक नटखट बालक
उसकी अठखेलियों को समझती और संभालती उसकी माँ

उमड़ते घुमड़ते बादल भी है नील गगन मे
बिखेरते सौंदर्य आकाश मे

फिर भी दिल मे है तेरी बात
तू दूर होकर भी पास है
शायद मैं हु यहाँ आकाश मे
लेकिन दिल तो तेरे ही पास है

यूं तेरा ख़यालों मे आना
और आके ख्यालो मे
झट से चले जाना

राज गुप्ता



नई सुबह

जब छाता है परेशानिओं का बादल
सब कुछ जैसे खो सा जाता है
चाहे कुछ पल के बाद छट  जाये वो बादल

लेकिन उस पल से पहले के पलों में इंसान
अपना सब कुछ लुटा सा पाता है
उन पलों को जीना उसके लिए
बहुत मुश्किल सा हो जाता है

उन पलों में ना जाने वो क्या क्या कर जाता है
आँधी की तरह वह पल अपने साथ बहुत कुछ उड़ा ले जाता है
चैन, धैर्य, साहस, ये सब इन्स्सन के पास तब कहां रह पाता है

उन पलों से केवल अपने को घिरा पाता है
छटपटाता है,  तड़पता है और ना जाने क्या क्या हो जाता है

जब छाता है परेशानिओं का बादल
तब दुख की बारिश और
सुख का अभाव ही सिर्फ नज़र आता है

परेशानिओं में इंसां भटक सा जाता है
अपने से ही अपने को वह नहीं बहला पाता है
जाने कहाँ कहाँ वो जाता है

बहुत मुश्किल हो जाता है उस बादल को हटाना
बहुत मुश्किल हो जाता है इस दौर को जी पाना

पर फिर भी इंसां को चाहिए
परेशानिओं में ना खुद को वो बेचैन करे
उस परेशानी का ख़ुदबखुद समाधान करे

परेशानिओं के बादल छटने का इंतज़ार करना होगा
हर रात के बाद सहर है
इसलिए इस रात को उसे जीना होगा

और उन परेशानिओं को ख़ुदबखुद ही दूर करना होगा
कोई नहीं आता रोते हुए को हसाने को
कोई नहीं आता गिरते हुए को उठाने को

सब को  ख़ुदबखुद ही उठना होगा
खुद ही रो कर हँसना होगा
अपने को जीत कर ही हर इंसान को जीना होगा

शालिनी गुप्ता
 



 

ज़िंदगी एक ख्वाब

जरूरी तो नहीं इस ज़िन्दगी में 
हर इंसां को हर ख़ुशी मिले
यहाँ किसी को गर फूल है मिले 
तो किसी को काटें भी मिले

ये ज़रूरी तो नहीं हर किसी का बागवां ही खिले
कोई तड़पता है ज़िन्दगी के लिए
किसी को चाहते हुए भी मौत ना मिले

हर इंसान भाग रहा है अपने आप से यहाँ
अपना साया तक भी खोजने पर भी अपना सा ना मिले 

हर कोई संघर्ष कर रहा है दो  रोटी के लिए 
किसी को वो रोटी खा कर भी मन का सुकूं ना मिले 
ज़िन्दगी में ख़ुशी मिली तो गम भी सबको संग संग है मिले

कोई तो एक ऐसा इंसान हो
जो समंपूर्ण सुखी मिले

कोई प्यार के लिए जीता है 
किसी को चाहते हुए भी प्यार ना मिले

संघर्ष तो हर कोई कर सकता है
ज़रूरी तो नहीं की मंजिल हर किसी को मिले 
ख्वाव तो सजाते है सभी यहाँ 
पर सभी के तो ख्वाब ना सच होते मिले

अरमानो का गला सभी तो है दबोचे हुए
अपने लिए तो जीता भी हर कोई और मरता भी है
ज़िन्दगी तो वो है जिससे हर किसी को खुशी
और बस खुशी ही मिले

अपनी तो दुआ भी यही है आरजू भी यही है
तमन्ना भी यही है
जो जो चाहे उसे वो मिले
ज़रूरी तो नहीं इस ज़िन्दगी में 
हर इंसां  को हर खुशी मिले 
   
शालिनी गुप्ता        

आत्मसंतुष्टि

सब कुछ है इंसान के पास
पर सुकून कहा है
सब कुछ है फिर भी संतोष कहा है

इंसान से इंसान ही जलता है
इंसान से इंसान ही मरता  है
ये दोष कहाँ है

प्यार ही  ढूंडता है , प्यार ही मांगता है
पर इस शब्द का जैसे सिर्फ नाम ही नाम है
अर्थ कहा है

इंसान तो भाग रहा है सिर्फ दौलत के पीछे
और  किसी का कोई मकसद ही कहाँ है
चाहे मैं  ही सही, दोषी मैं  भी हूँ
मगर इन सवालों का अंत कहा है

क्या यही ज़िन्दगी और यही हालात है
अगर यही सब है तो
वो जज्बात, वो एहसास कहाँ है

जो हो किसी के लिए वो अरमान कहाँ है
सब कुछ है यहाँ मगर संतोष और सुकून कहाँ है

शायद ये आबो हवा का है असर
वर्ना ऐसे तो हालत ना थे
ऐसे तो इंसान ना थे

शायद ये दुनिया बदलेगी एक  दिन
जब इंसान दौलत को छोड़कर
खुद को ढूंढेगा, खुद को पायेगा
और खुद के ही नामो निशाँ  छोड़ कर जाएगा

शायद वो दिन आएगा
जब इन्सान यूँ तो दौलत से ना जाने जाएगा
वो इससे भी अलग अपनी एक पहचान बनाएगा
और अपने नाम से ही सिर्फ इस दुनिया में जीएगा
जाना जाएगा
और इस दुनिया से जाएगा

शालिनी गुप्ता



    
   

मकसद जिंदगी का

किसी के लिए जी कर तो देखो
जीने का मज़ा आ जायेगा

किसी के लिए मर कर तो देखो
तुम्हे जीने का अंदाज़ आ जायेगा

किसी के होंटों पर मुस्कराहट लाकर तो देखो
तुम्हे मुस्कुराना आ जायेगा.
और तुम्हे खुश रहना आ जाएगा,

ज़िन्दगी को किसी के लिए लगा कर तो देखो
तुम्हे ज़िन्दगी का मायना समझ आ जाएगा
तुम्हे जीने का मकसद मिल जाएगा

किसी के लिए फूल राहों पर खिला कर तो देखो
तुम्हे काटों का भी दर्द सहना आ जायेगा
और फूलों की तरह मुरझा कर भी खिलना आ जायेगा

किसी के लिए ज़िन्दगी मिटा कर तो देखो
तुम्हे मर कर भी जीना आ जायेगा
तुम्हे मर कर भी जीना आ जायेगा

शालिनी गुप्ता

     
 

जिन्दादिली

मातम की तरह नहीं 
ज़िन्दगी को हर पल
को एक जशन की तरह जियो

रोना गर पल पल है नसीब में तो
हर पल अपने को हँसाकर जियो

इस तरह जियो की मौत से पहले ही मरो नहीं
गर जीना चाहते हो तो ज़िन्दगी को तो एक एक  पल जीयो

क्यौकी जीने के लिए तो ये ज़िन्दगी है
मौत तो है ही सत्य मरने के लिए
इस सत्य को झुठला कर
भुला कर जीयो

अपने से ही अपने को जीत कर जीयो
हर अश्क को बहा दो नहीं तो हर अश्क को पीयो
इतना भी नहीं पीयो इन अश्को को
एक  समुद्र दिल में ही बन जाए
और समुद्र में डुबो दो तुम अपने को
उस समुद्र को मिटा कट एक  नदी की तरह जीयो

ज़िन्दगी तो है ही ए दोस्त जीने के लिए
इसे निष्फल होकर सम्पूर्णता से जीयो....         

शालिनी गुप्ता




अन्जान सफर

यह ज़िन्दगी है  एक अनजान डगर
कोई नहीं जानता किस मोड़ पर क्या हो जाए
बस इस अनजानी डगर पर चलते जाना है

यह ज़िन्दगी है  एक अनजान सफ़र
कोई नही  जानता
किस मोड़ पर किस मोड़ पर मिल जाए कोई अनजाना
और बन जाए हमसफ़र

बस इस सफ़र पर युही चलते जाना है
यह ज़िन्दगी है जैसे एक अनदेखी नज़र
कब कहाँ चली जाए ये नज़र
बस इन नजरो को नजरो से मिलाना है

ये तो खुदा ही जानता है
किस्मत का क्या अफसाना है
हमें तो इसे हर हाल में स्वीकार करते जाना है
अपने से ही जंग अपने से ही द्वंध
अपने से ही यह युद्ध करते जाना है

यह ज़िन्दगी है क्या इसे समझना, जानना और समझाना है
अभी तो इसे बहुत कम जाना है
अपने ही बन जाए कब बेगाने
और कब बेगानों में से ही अपनों को खोजना और अपना बनाना
यह ज़िन्दगी है अनजान डगर....      

शालिनी गुप्ता


माँ

जिंदगी की हर परिस्थिती को वो समझती है
जिंदगी की हर परिस्थिती, वो हमे समाझातीहै
जिंदगी की हर बुराई  से   बचना
और अच्छाई   को अपनाना, वो हमें सिखाती है

दर्द लेती है वो हमें लाने में
और हमें भी दर्द सहना वो सिखाती हैजिंदगी के कितने पहलु,  वो हमें दिखलाती  है
खुदा के बाद वो ही तो है ,जो हमें नज़र आती है
जब भी कोई परेशानी होती है
व्ही  हमारे रूबरू आती है
और जिंदगी का आयना हमें दिखाती है

जिंदगी कैसी है,  क्या  है
ये माँ ही तो है जो हमें समझती है, और समझाती है
कभी संस्कार कभी आशीर्वाद,
कभी दुआं और कभी शक्ति बनकर,
हमें चलना सिखाती है
हमें जीना सिखाती है
ये माँ ही तो है जो परछाई  बनकर हमारे साथ है
ये माँ ही तो है जो दुआ  बनकर,
हमेशा  हमारे पास  है

शालिनी गुप्ता  
    

आत्मविश्वास

वक्त का दौर है ये
वक्त ये भी यू ही गुजर जायगा

जो भी तूफ़ा,  जो भी मंजर सामने आयगा
उससे हमें गुजर कर जाना ही होगा
हमें न अब यू उससे घबराना  होगा
खुद के  साथ से और तकदीर केहाथ से
अब हमें हाथ मिलाना ही होगा
 
वक्त का दौर है ये,
वक्त ये भी यू ही गुजर जायगा

हम वाकिफ है हर सच्चाई से और हर बुराई से
साथ हमें अब सच्चाई का निभाना ही होगा
कब तक यू ही, मर मर कर जिए हम
अब जिंदगी को  हमें,  जी  जाना ही होगा
अपने आपको पहचान कर और जानकर
आएने के सामने  आना ही होगा
भागकर नहा, घबराकर नहीं
इस जिंदगी को जिंदादिली से बदल जाना ही  होगा

होसले बुलंद रख, खुद को  खुद के पास रखकर
मन की आवाज़ को सुनना ही होगा
और फिर ये फेसला हमारा नहीं, खुद खुदा का ही होगा
और तब इस जिंदगी का रुख कुछ और ही होगा
 

वक्त का दौर है ये
वक्त ये भी यू ही गुजर जायगा |

शालिनी गुप्ता