माँ ही है जो

माँ ही है जो 
आँचल मे छुपाकर धुप छाँव से बचाती है

माँ ही है जो 
हर तूफां से बचाती है

माँ ही है जो 
हमारे हर नाज़ नखरे उठाती है

माँ ही है जो 
अपनी दुआओं से हमें हर बला से बचाती है

माँ ही है जो 
काला टिका लगाकर हर बुरी नज़र से हमें बचाती है
माँ है तो घर मे आवाज आती है

माँ ही है जो 
पास ना होकर भी हमारे अहसासों में हमारे साथ रहती है

माँ ही है जो 
अंधेरो से निकालकर हमें रौशनी दिखाती है

माँ ही है जो 
हमारी एक आहट पर सोते हुए भी जग जाती है
 
माँ है तो ज़हाँ में अपनापन लगता है
माँ है तो ये संसार अपना सा लगता है


शालिनी गुप्ता

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