चलो कुछ जिंदगी से लम्हें उधार लेते है
चलो आज ज़िंदगी को जीते हैहवाओं को छूते है
आसमां से बात करते है
भागती तितलियों के पीछे भागते है
और परिंदो सी उड़ान भरते है
कुछ भूलकर अनजान बनकर
ज़िंदगी को जीते है
चलो कुछ जिंदगी से लम्हें उधार लेते है
गर्मी से मचलते है
और बारिश में भीगते है
कुछ अनदेखा कर, कुछ अनसुना कर
बस ज़िंदगी को जीते है
नासमझी से चलते है
रात की ख़ामोशियों में
तारों को गिनते है
ज़िंदगी को यू आसां करते है
चलो कुछ जिंदगी से लम्हें उधार लेते है
कुछ सूकून से मिलते है
कुछ सूकून से जीते है
भागती दौड़ती ज़िंदगी में
चलो कहीं रुकते है
और सांसों को गिनते है
यूं ही बीत जाएगी उम्र और ज़िंदगी दोनों
इसे ना यू बर्बाद करते है
इसे आबाद करते है
चलो कुछ जिंदगी से लम्हें उधार लेते है
शालिनी गुप्ता
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