घर की रौनक

दूर होकर भी जो पास रहती है
हर दुख जो माँ बाप से छुपाती है
कुछ भी होने पर दूर होकर भी वो आती है
कुछ भी होने पर पास ना होकर भी वो आती है
वो बेटी कहलाती है

अपने आँसू छुपाकर माँ बाप को हॅसाती है
हर मोड़ पर जो साथ निभाती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप का आँगन छोड़कर दूजा आँगन सजाती है
साथ ही अपने घर की बगिया को भी महकाती है
वो बेटी कहलाती है

रंग बिखराकर जो दो दो आँगन में 
रंगोलियाँ सजाती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप की परछाई जो बन जाती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप के नाम को उचाईयों तक पहुँचती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप का इंतज़ार जो बन कर रहती है
वो बेटी कहलाती है

हर ख़ुशी हर दुःख में जो साथ निभाती है
वो बेटी कहलाती है

माँ बाप को सहारा बन जो उनका 
हाथ थामकर चलाती है
वो बेटी कहलाती है


शालिनी गुप्ता 

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