सिंदूर का शौर्य

तूफां का मंजर आया है
फिर इतिहास बनाने का समय आया है

फिर देश की मिट्टी पर 
लहू बहाने का समय आया है

हर सैनिक की कुर्बानी का अब समय आया है

देश की मिट्टी पर हर बेटों के साथ 
माँओं का भी बलिदान रंग लाया है

झंडे के रंग को 
बरक़रार रखने के लिए
कितने सैनिको ने खून बहाया है

देश की आन को बचाने के लिए बेटों के साथ 
माँओं का भी बलिदान काम आया है

खतरों के बादल मंडरा रहें है चारो तरफ 
उन बादलों को हटाने का समय आया है

हर तूफां से लड़ने और देश पर 
मर मिटने का समय आया है

सिन्दूर जो उजाड़े थे 
उन्हें अब बचाने का समय आया है

देश की संस्कृति पर 
मर मिटने का समय आया है

देश की मिटटी को बचाने का समय आया है 
फिर देश की मिट्टी पर 
लहू बहाने का समय आया है 

शालिनी गुप्ता 

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