नहीं वो रहना चाहती
पंछी की तरह आकाश में
उड़ना है वो चाहती
तितली की तरह उड़कर
हर रंग को वो देखना है चाहती
खुशियों के लिए अपनी वो जीना है चाहती
गम से सामना गर हो भी जाये तो
नहीं वो घबराती
थक भी जायें गर कदम
पर मंजिल की और वो
खुशियों के लिए अपनी वो जीना है चाहती
गम से सामना गर हो भी जाये तो
नहीं वो घबराती
थक भी जायें गर कदम
पर मंजिल की और वो
अपना हर कदम है बढाती
खामोश रहकर नहीं वो
खामोश रहकर नहीं वो
शोर मचाकर ज़िंदगी को जीना है चाहती
पीछे मुड़कर नहीं देखती वो
सिर्फ आगे बढ़ना है चाहती
ऐसी है वो मेरी नन्ही पारी
जो अपने पंखो को फैलाना है चाहती
सब के लिए खुशियाँ चुनती
अपनी हर जगह मुस्कुराहट ही उसने है बाँटी
उसका हर सपना पूरा हो
उसकी ख़ुशी से हमें ज़िंदगी और
पीछे मुड़कर नहीं देखती वो
सिर्फ आगे बढ़ना है चाहती
ऐसी है वो मेरी नन्ही पारी
जो अपने पंखो को फैलाना है चाहती
सब के लिए खुशियाँ चुनती
अपनी हर जगह मुस्कुराहट ही उसने है बाँटी
उसका हर सपना पूरा हो
उसकी ख़ुशी से हमें ज़िंदगी और
भी खूबसूरत नज़र है आती
उसे वो सब मिले जो वो है चाहती
यही दुआ यही आशीष सिर्फ
हमारे लबों पर है आती
शालिनी गुप्ता
उसे वो सब मिले जो वो है चाहती
यही दुआ यही आशीष सिर्फ
हमारे लबों पर है आती
शालिनी गुप्ता
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