एक दोस्त - क्या खोया, क्या पाया

ना जाने क्या खोया, ना जाने क्या पाया
एक अच्छा सा दोस्त जब कुछ पल के लिए जीवन मे आया
संस्कार से ओतप्रोत,  आँखों में सच्चाई,  मन साफ़
उसके अंदर कुछ तो है  बात, कुछ तो है बात क्योंकि
दम तोडती मानवता, खोकले  होते विवेक और
धुंधली होती आशा के बीच, उसने नवसंचार जगाया
पाकर उसको ऐसा लगा जेसे मेरे जीवन में भी कुछ परिवर्तन  आया
टूटता  हुआ विश्वास लोगो पर से शायद  बिखरते  बिखरते कुछ संभल पाया
हसना भूलने लगा था सच मे, उसका साथ पा कर कुछ पल तो हंस पाया
जाते देख अपने से दूर उस दोस्त को, हर्दय से उमड़ वेदना आई
पलको को डाला आँखों पे, छलकने से आँखों को पलके  भी ना रोक पाई
पर उसकी खुसी थी जाने मे, और मेरी ख़ुशी थी उसको उसकी ख़ुशी पाने मे
शायद फिर मुलाकात हो ना हो, बात हो या ना हो
फिर भी मेरे अहसास, मेरी दुआ उसके साथ है,
दूर होकर भी वो दोस्त मेरे पास है
ना जाने क्या खोया, ना जाने क्या पाया
एक अच्छा सा दोस्त जब कुछ पल के लिए जीवन मे आया
................राज गुप्ता

1 comment:

  1. Sir, I am speechless to say anything, indeed i have no words .

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